ग्रह–नक्षत्रों में उलझे हम, और भुगती सैकड़ों सालों की ग़ुलामी || आचार्य प्रशांत, दीपोत्सव (2025)

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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वीडियो जानकारी: 26.10.2025, भगवद् गीता सत्र

Title: ग्रह–नक्षत्रों में उलझे हम, और भुगती सैकड़ों सालों की ग़ुलामी || आचार्य प्रशांत, दीपोत्सव (2025)

📋 Chapters:
00:00 - Intro
01:16 - ज्योतिष का मनोविज्ञान
6:47 - एस्ट्रोलॉजी बनाम एस्ट्रोनॉमी
14:14 - कैसे गुलाम बना भारत?
19:57 - विज्ञान या विश्वास?
26:46 - कैसे विज्ञान बना ब्रिटिश की ताकत?
37:55 - मान्यता नहीं, सवाल चाहिए  
48:39 - भाग्य या जिम्मेदारी - किसे चुनें?  
01:02:12 - साइंस के नाम पर अंधविश्वास
01:06:14 - क्या है असली मिस्टीसिज़्म?  
01:19:01 - कैसे होगा भारत का पुनर्जागरण?

विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत ज्योतिष, राशिफल और भविष्य-वाणी जैसी धारणाओं पर बढ़ती निर्भरता को शांत, तर्कपूर्ण और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ स्पष्ट करते हैं। वे बताते हैं कि ग्रह-नक्षत्रों के मानव-जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव के ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी ज्योतिष की लोकप्रियता अक्सर मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्तियों से जुड़ी रहती है। वार्ता में वे यह भी समझाते हैं कि इतिहास में वैज्ञानिक अवलोकन, समुद्री यात्राएँ, मानचित्रण और समय-ज्ञान जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति ने कई देशों को मजबूत बनाया, जबकि अनुमान-आधारित परंपराओं पर अत्यधिक भरोसे ने भारत की गति को धीमा किया।

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