द्वारीखाल ब्लॉक के जल्ठा गाँव हर्षमोहन अमोली जी विपरीत परिस्थितियों में भी पिछले साल से बकरीपालन कर रहे हैं। पलायन की वजह से घर गांव खाली हो चुके हैं या गांव में गिने चुने लोग रह गए हैं। लैंटाना एवं अन्य झाड़ियां घर के चौक (आंगन) तक पहुंच चुकी हैं। जिसके कारण बाघ, गुलदार एवं तेंदुए जैसे जानवरों का भय बना हुआ है। हिंसक जानवर गोशाला तोड़कर पालतू पशुओं को मार रहे हैं, कुत्ते या अन्य पालतू पशु गलती से घर के बाहर रह गए तो उनकी मौत निश्चित है। जंगली जानवरों से पशु ही नहीं मनुष्य भी सुरक्षित नहीं है।
हर्षमोहन अमोली जी विपरीत परिस्थितियों का डरकर मुकाबला करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं।
बकरी पालन के साथ साथ मुर्गीपालन भी कर रहे हैं, हैचिंग मशीन से चूजों का उत्पादन भी कर रहे हैं।
मैं एक साल पहले अमोली जी के फार्म पर गया था तब फार्म को कुछ महीने हुए थे। वे आज भी उसी जोश के साथ काम कर रहे हैं। पिछले साल 60/65 बकरियां और 10/12 मुर्गियां थी। इस साल बकरियां 80 से ऊपर और मुर्गियां 50 से ऊपर हैं, जबकि मुर्गियां और बकरियां लगातार बिक रही हैं। एक साल में उन्होंने 3 लाख से अधिक का व्यापार किया है।
यदि उत्तराखंड में इसी तरह लोग पशुपालन और खेती करें तो उत्तराखंड का विकास संभव है, पलायन और बेरोजगारी को हराया जा सकता है।
हर्षमोहन अमोली का संपर्क सूत्र 7505097228
द्वारीखाल ब्लॉक के जल्ठा गाँव हर्षमोहन अमोली जी विपरीत परिस्थितियों में भी पिछले साल से बकरीपालन कर रहे हैं। पलायन की वजह से घर गांव खाली हो चुके हैं या गांव में गिने चुने लोग रह गए हैं। लैंटाना एवं अन्य झाड़ियां घर के चौक (आंगन) तक पहुंच चुकी हैं। जिसके कारण बाघ, गुलदार एवं तेंदुए जैसे जानवरों का भय बना हुआ है। हिंसक जानवर गोशाला तोड़कर पालतू पशुओं को मार रहे हैं, कुत्ते या अन्य पालतू पशु गलती से घर के बाहर रह गए तो उनकी मौत निश्चित है। जंगली जानवरों से पशु ही नहीं मनुष्य भी सुरक्षित नहीं है।
हर्षमोहन अमोली जी विपरीत परिस्थितियों का डरकर मुकाबला करते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं।
बकरी पालन के साथ साथ मुर्गीपालन भी कर रहे हैं, हैचिंग मशीन से चूजों का उत्पादन भी कर रहे हैं।
मैं एक साल पहले अमोली जी के फार्म पर गया था तब फार्म को कुछ महीने हुए थे। वे आज भी उसी जोश के साथ काम कर रहे हैं। पिछले साल 60/65 बकरियां और 10/12 मुर्गियां थी। इस साल बकरियां 80 से ऊपर और मुर्गियां 50 से ऊपर हैं, जबकि मुर्गियां और बकरियां लगातार बिक रही हैं। एक साल में उन्होंने 3 लाख से अधिक का व्यापार किया है।
यदि उत्तराखंड में इसी तरह लोग पशुपालन और खेती करें तो उत्तराखंड का विकास संभव है, पलायन और बेरोजगारी को हराया जा सकता है।
हर्षमोहन अमोली का संपर्क सूत्र 7505097228