"भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान!
Watch the video song of ''Darshan Do Bhagwaan'' here - दर्शन दो भगवान | Darshan Do Bhagwaan | Sur...
युद्धस्थल पर रथ पर सवार रावण अपने बाणों से वानर सेना को क्षति पहुँचाते हुए आगे बढ़ता है, हनुमान और अंगद उसे रोकने का प्रयास करते है, लेकिन सफल नहीं हो पाते है। तब लक्ष्मण श्री राम की आज्ञा लेकर रावण से युद्ध करने के लिए आगे आते है, लेकिन जब लक्ष्मण के द्वारा चलाए हुए बाणों को भी रावण अपने बाणों से निष्क्रिय कर देता है। तब स्वयं श्री राम युद्धस्थल में आकर रावण से कहते है कि उसने अनीति, अनाचार और अत्याचार से पूरे संसार को आँसुओं में डुबोया है। उसने अभिमान वश बखान तो बहुत किया है, अब करके क्या दिखाएगा। राम की बातें रावण को अच्छी नहीं लगती है, वह राम से धनुष-बाण से बात करने के लिए कहता है। बाणों के प्रहारों के साथ सत्य और असत्य की मध्य महासंग्राम प्रारम्भ हो जाता है। तभी रावण की दृष्टि विभीषण पर पड़ती है, वह उसे कुलद्रोही कहते हुए उस पर प्रचण्ड शक्ति से प्रहार करता है, लेकिन उस शक्ति का आघात राम अपने वक्ष पर लेकर विभीषण को बचा लेते है। श्री राम अवचेतन होने पर विभीषण, हनुमान, सुग्रीव और जामवन्त सब मिलकर रावण पर आक्रमण कर देते है, जिससे रावण मूर्छित होता है। अपने स्वामी को संकट में देख रावण का सारथी रथ को युद्धस्थल से बाहर निकाल ले जाता है। मूर्छा समाप्त होने पर रावण सारथी को डाँटता है और पुनः युद्धस्थल में आ जाता है। राम और रावण के मध्य पुनः युद्ध प्रारम्भ होने पर दोनों तरफ से दिव्य अस्त्रों का प्रयोग होता है। लेकिन सूर्य के अस्त होने के कारण युद्ध अगले दिन तक के लिए रुक जाता है।
संसार में मनुष्य को धर्म के अनुरुप मर्यादित जीवन जीने की शिक्षा देने के लिए युगों से विभिन्न कथाओं के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास किया गया है। सनातन धर्म में कथाओं को विशेष महत्व है और मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक हर अवसर के लिए कथा, हर पूजा-विधान के लिए कथा। इन कथाओं को सुनने व अनुसरण करने से मानव के सामाजिक जीवन में विशेष प्रभाव पड़ता है और रामायण और भगवत् गीता जैसे महान ग्रंथो (कथाओं) में मानव जीवन का सार छुपा है। यह दिव्य कथाएं धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों से परिचय करा मनुष्य को सामाजिक जीवन जीने के कला को निपुण बनाने का कार्य करने के साथ प्रेरणा का कार्य करती है। “तिलक” अपने इस नये संकलन “दिव्य कथाएं” में सर्वप्रथम रामायण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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"भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान!
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युद्धस्थल पर रथ पर सवार रावण अपने बाणों से वानर सेना को क्षति पहुँचाते हुए आगे बढ़ता है, हनुमान और अंगद उसे रोकने का प्रयास करते है, लेकिन सफल नहीं हो पाते है। तब लक्ष्मण श्री राम की आज्ञा लेकर रावण से युद्ध करने के लिए आगे आते है, लेकिन जब लक्ष्मण के द्वारा चलाए हुए बाणों को भी रावण अपने बाणों से निष्क्रिय कर देता है। तब स्वयं श्री राम युद्धस्थल में आकर रावण से कहते है कि उसने अनीति, अनाचार और अत्याचार से पूरे संसार को आँसुओं में डुबोया है। उसने अभिमान वश बखान तो बहुत किया है, अब करके क्या दिखाएगा। राम की बातें रावण को अच्छी नहीं लगती है, वह राम से धनुष-बाण से बात करने के लिए कहता है। बाणों के प्रहारों के साथ सत्य और असत्य की मध्य महासंग्राम प्रारम्भ हो जाता है। तभी रावण की दृष्टि विभीषण पर पड़ती है, वह उसे कुलद्रोही कहते हुए उस पर प्रचण्ड शक्ति से प्रहार करता है, लेकिन उस शक्ति का आघात राम अपने वक्ष पर लेकर विभीषण को बचा लेते है। श्री राम अवचेतन होने पर विभीषण, हनुमान, सुग्रीव और जामवन्त सब मिलकर रावण पर आक्रमण कर देते है, जिससे रावण मूर्छित होता है। अपने स्वामी को संकट में देख रावण का सारथी रथ को युद्धस्थल से बाहर निकाल ले जाता है। मूर्छा समाप्त होने पर रावण सारथी को डाँटता है और पुनः युद्धस्थल में आ जाता है। राम और रावण के मध्य पुनः युद्ध प्रारम्भ होने पर दोनों तरफ से दिव्य अस्त्रों का प्रयोग होता है। लेकिन सूर्य के अस्त होने के कारण युद्ध अगले दिन तक के लिए रुक जाता है।
संसार में मनुष्य को धर्म के अनुरुप मर्यादित जीवन जीने की शिक्षा देने के लिए युगों से विभिन्न कथाओं के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास किया गया है। सनातन धर्म में कथाओं को विशेष महत्व है और मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक हर अवसर के लिए कथा, हर पूजा-विधान के लिए कथा। इन कथाओं को सुनने व अनुसरण करने से मानव के सामाजिक जीवन में विशेष प्रभाव पड़ता है और रामायण और भगवत् गीता जैसे महान ग्रंथो (कथाओं) में मानव जीवन का सार छुपा है। यह दिव्य कथाएं धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों से परिचय करा मनुष्य को सामाजिक जीवन जीने के कला को निपुण बनाने का कार्य करने के साथ प्रेरणा का कार्य करती है। “तिलक” अपने इस नये संकलन “दिव्य कथाएं” में सर्वप्रथम रामायण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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