आज का सारांश - श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम भगवान
वत्सासुर वध
एक दिन श्रीकृष्ण तथा बलराम अपने ग्वालबाल मित्रों के साथ यमुना के तट पर खेल रहे थे। उसी समय वत्सासुर नामक असुर बछड़े का रूप धारण करके उनके बीच आ गया। श्रीकृष्ण ने उसे पहचान लिया और उसका पीछा करते हुए उसकी पिछली टाँगें तथा पूँछ पकड़ ली। उन्होंने उसे बलपूर्वक घुमाकर एक वृक्ष पर फेंक दिया। इस प्रकार वत्सासुर का वध हो गया। यह देखकर सभी ग्वालबाल अत्यन्त प्रसन्न हुए और देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा की।
बकासुर वध
एक दिन श्रीकृष्ण तथा ग्वालबाल बछड़ों को लेकर यमुना के तट पर पहुँचे। वहाँ उन्हें पर्वत के समान विशाल बकासुर दिखाई दिया। वह कंस का मित्र था और उसने श्रीकृष्ण को अपनी चोंच से पकड़कर निगल लिया। परन्तु श्रीकृष्ण के शरीर के तेज के कारण बकासुर को अत्यन्त पीड़ा होने लगी और उसने श्रीकृष्ण को बाहर निकाल दिया। इसके बाद बकासुर ने फिर श्रीकृष्ण पर आक्रमण करने का प्रयास किया। तब श्रीकृष्ण ने उसकी चोंच पकड़कर उसे दो भागों में चीर दिया और उसका वध कर दिया। देवताओं ने प्रसन्न होकर पुष्पवर्षा की।
हरे कृष्ण दण्डवत् प्रणाम। 🙏
आज का सारांश - श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम भगवान
वत्सासुर वध
एक दिन श्रीकृष्ण तथा बलराम अपने ग्वालबाल मित्रों के साथ यमुना के तट पर खेल रहे थे। उसी समय वत्सासुर नामक असुर बछड़े का रूप धारण करके उनके बीच आ गया। श्रीकृष्ण ने उसे पहचान लिया और उसका पीछा करते हुए उसकी पिछली टाँगें तथा पूँछ पकड़ ली। उन्होंने उसे बलपूर्वक घुमाकर एक वृक्ष पर फेंक दिया। इस प्रकार वत्सासुर का वध हो गया। यह देखकर सभी ग्वालबाल अत्यन्त प्रसन्न हुए और देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा की।
बकासुर वध
एक दिन श्रीकृष्ण तथा ग्वालबाल बछड़ों को लेकर यमुना के तट पर पहुँचे। वहाँ उन्हें पर्वत के समान विशाल बकासुर दिखाई दिया। वह कंस का मित्र था और उसने श्रीकृष्ण को अपनी चोंच से पकड़कर निगल लिया। परन्तु श्रीकृष्ण के शरीर के तेज के कारण बकासुर को अत्यन्त पीड़ा होने लगी और उसने श्रीकृष्ण को बाहर निकाल दिया। इसके बाद बकासुर ने फिर श्रीकृष्ण पर आक्रमण करने का प्रयास किया। तब श्रीकृष्ण ने उसकी चोंच पकड़कर उसे दो भागों में चीर दिया और उसका वध कर दिया। देवताओं ने प्रसन्न होकर पुष्पवर्षा की।
हरे कृष्ण दण्डवत् प्रणाम। 🙏