गरुड़ पुराण”।।
"जीवन और मृत्यु…
दो ऐसे सत्य, जिनसे कोई नहीं बच सकता।
मृत्यु — वह रहस्य है, जिसके आगे मनुष्य का ज्ञान थम जाता है।
और तभी उठता है वह शाश्वत प्रश्न — मृत्यु के बाद क्या होता है?
क्या आत्मा यहीं विलीन हो जाती है?
क्या हमारे पितृ वास्तव में हमें देख रहे होते हैं?
क्या हमारे कर्म ही हमारी अगली यात्रा का मार्ग तय करते हैं?
मित्रों, इन रहस्यों का उत्तर छिपा है गरुड़ पुराण में।
भगवान श्रीहरि विष्णु ने स्वयं अपने दिव्य वाहन गरुड़ जी को यह अमृत ज्ञान सुनाया था।
यह कोई साधारण पुराण नहीं, बल्कि वह दिव्य मार्गदर्शक है, जो आत्मा को मृत्यु के बाद के कठिन और रहस्यमय मार्ग पर ले चलता है।
और पितृ पक्ष… यह वह पावन समय है जब हमारी आत्माएं, हमारे पूर्वज, हमारे पितृ, पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी संतानों के श्राद्ध और तर्पण से तृप्त होते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है —
गरुड पुराण आत्मा के मोक्ष और शांति के लिए है, परंतु गरुड पुराण का अध्ययन, पठन और श्रवण हम कभी भी कर सकते हैं।
‘विशेष रूप से पितृ पक्ष में गरुड़ पुराण का श्रवण करने से, पितरों को शांति मिलती है, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वंशजों का जीवन भी समृद्ध और संतुलित होता है।’
गरुड़ पुराण हमें सिखाता है —
कौन से कर्म हमें स्वर्ग की ओर ले जाते हैं और कौन से हमें नरक में धकेलते हैं।
कौन से आचरण आत्मा को मुक्त करते हैं और कौन से उसे पुनर्जन्म के चक्र में बाँध देते हैं।
मित्रों, आज आप उस दिव्य पुराण का श्रवण करने जा रहे हैं, जिसे सुनना मात्र ही —
पापों का क्षय करता है, आत्मा को निर्मल बनाता है और पितरों को परम गति प्रदान करता है।
pitrapaksh
pitrupaksh
श्राद्ध
श्राद्धपक्ष
श्राद्ध मे भगवद गीता का कौनसा अध्याय सुने
पित्रपक्ष मे गीता का कौनसा अध्याय सुनना चाहिए।
गरुड़ पुराण सार
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दो ऐसे सत्य, जिनसे कोई नहीं बच सकता।
मृत्यु — वह रहस्य है, जिसके आगे मनुष्य का ज्ञान थम जाता है।
और तभी उठता है वह शाश्वत प्रश्न — मृत्यु के बाद क्या होता है?
क्या आत्मा यहीं विलीन हो जाती है?
क्या हमारे पितृ वास्तव में हमें देख रहे होते हैं?
क्या हमारे कर्म ही हमारी अगली यात्रा का मार्ग तय करते हैं?
मित्रों, इन रहस्यों का उत्तर छिपा है गरुड़ पुराण में।
भगवान श्रीहरि विष्णु ने स्वयं अपने दिव्य वाहन गरुड़ जी को यह अमृत ज्ञान सुनाया था।
यह कोई साधारण पुराण नहीं, बल्कि वह दिव्य मार्गदर्शक है, जो आत्मा को मृत्यु के बाद के कठिन और रहस्यमय मार्ग पर ले चलता है।
और पितृ पक्ष… यह वह पावन समय है जब हमारी आत्माएं, हमारे पूर्वज, हमारे पितृ, पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी संतानों के श्राद्ध और तर्पण से तृप्त होते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है —
गरुड पुराण आत्मा के मोक्ष और शांति के लिए है, परंतु गरुड पुराण का अध्ययन, पठन और श्रवण हम कभी भी कर सकते हैं।
‘विशेष रूप से पितृ पक्ष में गरुड़ पुराण का श्रवण करने से, पितरों को शांति मिलती है, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और वंशजों का जीवन भी समृद्ध और संतुलित होता है।’
गरुड़ पुराण हमें सिखाता है —
कौन से कर्म हमें स्वर्ग की ओर ले जाते हैं और कौन से हमें नरक में धकेलते हैं।
कौन से आचरण आत्मा को मुक्त करते हैं और कौन से उसे पुनर्जन्म के चक्र में बाँध देते हैं।
मित्रों, आज आप उस दिव्य पुराण का श्रवण करने जा रहे हैं, जिसे सुनना मात्र ही —
पापों का क्षय करता है, आत्मा को निर्मल बनाता है और पितरों को परम गति प्रदान करता है।
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श्राद्ध
श्राद्धपक्ष
श्राद्ध मे भगवद गीता का कौनसा अध्याय सुने
पित्रपक्ष मे गीता का कौनसा अध्याय सुनना चाहिए।
गरुड़ पुराण सार
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