स्वामी रामसुखदास जी का लेख -
भगवान को वही भक्त प्यारा लगता है जिसका कोई दूसरा सहारा नहीं है
इसलिए केवल भगवान के आश्रित रहे और भजन करें
परमात्मा की प्राप्ति ऐसे है जैसे बालक अपनी मां के गोद में जाए
भगवान की प्रति हमारी योग्यता से नहीं होती वह अपनी कृपा से ही अपना प्रेम दे देते हैं
भक्त सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है तो भगवान को आना ही पड़ता है
बार-बार प्रार्थना करते ही रहो
गुरुदेव : वृत्ति को सुधारने में लगने के बजाय भगवान को पुकारते रहो । निर्बल कोई बनना नहीं चाहता परंतु इस यात्रा में चलते-चलते एक स्थिति ऐसी आती है की निर्बलता का अनुभव हो जाता है, कि मैं तो बिल्कुल बेकार हूं!
स्वामी रामसुखदास जी का लेख -
भगवान को वही भक्त प्यारा लगता है जिसका कोई दूसरा सहारा नहीं है
इसलिए केवल भगवान के आश्रित रहे और भजन करें
परमात्मा की प्राप्ति ऐसे है जैसे बालक अपनी मां के गोद में जाए
भगवान की प्रति हमारी योग्यता से नहीं होती वह अपनी कृपा से ही अपना प्रेम दे देते हैं
भक्त सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है तो भगवान को आना ही पड़ता है
बार-बार प्रार्थना करते ही रहो
गुरुदेव : वृत्ति को सुधारने में लगने के बजाय भगवान को पुकारते रहो । निर्बल कोई बनना नहीं चाहता परंतु इस यात्रा में चलते-चलते एक स्थिति ऐसी आती है की निर्बलता का अनुभव हो जाता है, कि मैं तो बिल्कुल बेकार हूं!