पोलैंड की पाँच छात्राएँ भारत में अपना पर्स खो बैठीं। पैसे खत्म हुए तो उन्हें एक गुरुद्वारे में लंगर के बारे में पता चला। वहाँ उन्होंने सिर्फ़ मुफ्त भोजन ही नहीं देखा, बल्कि सेवा, समानता और इंसानियत का ऐसा रूप देखा जिसने भारत को लेकर उनकी सोच बदल दी।
यह कहानी भारतीय सेवा-भावना, लंगर की परंपरा और मानवीय समानता से प्रेरित एक नाटकीय/काल्पनिक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, देश या समुदाय के बारे में गलत धारणा बनाना नहीं है।
पोलैंड की पाँच छात्राएँ भारत में अपना पर्स खो बैठीं। पैसे खत्म हुए तो उन्हें एक गुरुद्वारे में लंगर के बारे में पता चला। वहाँ उन्होंने सिर्फ़ मुफ्त भोजन ही नहीं देखा, बल्कि सेवा, समानता और इंसानियत का ऐसा रूप देखा जिसने भारत को लेकर उनकी सोच बदल दी।
यह कहानी भारतीय सेवा-भावना, लंगर की परंपरा और मानवीय समानता से प्रेरित एक नाटकीय/काल्पनिक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, देश या समुदाय के बारे में गलत धारणा बनाना नहीं है।