जय जिनेन्द्र आदरणीय विपिन जी भाई साहब सादर प्रणाम 🙏🏻ज्ञानी और अज्ञानी के इच्छा और अनिच्छा का रहस्य समझ आने लगा हैं ज्ञानी के भोग भोगते हुए भी बंध क्यू नहीं होता अज्ञानी के भोग न भोगते हुए भी बंध क्यू होता हैं आपने इतना सरल करके समझाया है .आभार 🙏🏻🙏🏻👌🏻👌🏻