पत्रकार महोदय जी अपने दिल पर हाथ रखकर बताएं कि क्या आदिवासी इलाकों में नक्सली नहीं होती तो क्या पुंजिवादी सरकारें आदिवासी इलाकों में हॉस्पिटल, स्कूल बना दिये होते? मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई होती? आजादी के बाद आदिवासी, दलित, मजदूर लोगों को शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार रोटी कपड़ा और मकान बिजली की व्यवस्था कर दी गई होती ,तो क्या लोग नक्सली बनते?