कहानी सुनते-सुनते मुरली सहज याद हो जायेगी।
27 सितम्बर 2026 की अव्यक्त मुरली पर आधारित कहानी — "मेरा और तेरा"
दिवाली से एक रात पहले। सौ टिफिन, सुबह सात बजे की डिलीवरी, और काग़ज़ पर लिखी शर्त — एक भी बिगड़ा, तो घर की चाबी सेठ की। और तभी दाल की देग से जलने की गंध उठती है...
सुधा आठ महीने से मुरली सुनती है, पर डेढ़ लाख के क़र्ज़ के आगे उसका मन टिफिन और फीस ही गिनता रहता है। क्लास में सुनी एक छोटी-सी बात — "मेरे को तेरे में बदल लो" — उस दिन उसके कानों से होकर निकल जाती है। पर जिस रात उसके पास कुछ नहीं बचता, वही बात लौटकर आती है।
आज की मुरली के बिंदु, इस कहानी में:
• बाप ने सभी बच्चों के जीवन से फिकर लेकर फखुर दे दिया है।
• जिनके जीवन में फखुर नहीं फिकर है उनके मस्तक में लाइट नहीं चमकती है। उनके मस्तक में बोझ की रेखायें देखने में आती हैं।
• जो भी थोड़ा बहुत फिकर आता है तो मेरे को तेरे में बदल लो। फर्क क्या है? ते और मैं, इतना छोटा सा फर्क है।
• कोई भी निर्बल आत्मा आपके सामने आये तो उस निर्बल को बल दो।
• तीव्र पुरुषार्थी बनने के लिए मुख्य पुरुषार्थ है सेकण्ड में बिन्दी लगाना। सेकण्ड और बिन्दी, दोनों समान।
• वरदान: स्वरूप बन अन्य आत्माओं को भी स्वरूप का अनुभव कराना - यही है सबूत देना अर्थात् सपूत वा साक्षात्कार मूर्त बनना।
• हिम्मते बच्चे एक बार तो बाप हजार बार मददगार है।
• सण्डे के दिन जो भी कुछ अपने जीवन में संकल्प मात्र भी कमजोरी हो, स्वप्न मात्र भी कमजोरी हो उसको छुट्टी देना है।
ओम् शान्ति।
#आजकीमुरली #मुरलीसेकहानी #BrahmaKumaris #BKMurli #MurliStory
कहानी सुनते-सुनते मुरली सहज याद हो जायेगी।
27 सितम्बर 2026 की अव्यक्त मुरली पर आधारित कहानी — "मेरा और तेरा"
दिवाली से एक रात पहले। सौ टिफिन, सुबह सात बजे की डिलीवरी, और काग़ज़ पर लिखी शर्त — एक भी बिगड़ा, तो घर की चाबी सेठ की। और तभी दाल की देग से जलने की गंध उठती है...
सुधा आठ महीने से मुरली सुनती है, पर डेढ़ लाख के क़र्ज़ के आगे उसका मन टिफिन और फीस ही गिनता रहता है। क्लास में सुनी एक छोटी-सी बात — "मेरे को तेरे में बदल लो" — उस दिन उसके कानों से होकर निकल जाती है। पर जिस रात उसके पास कुछ नहीं बचता, वही बात लौटकर आती है।
आज की मुरली के बिंदु, इस कहानी में:
• बाप ने सभी बच्चों के जीवन से फिकर लेकर फखुर दे दिया है।
• जिनके जीवन में फखुर नहीं फिकर है उनके मस्तक में लाइट नहीं चमकती है। उनके मस्तक में बोझ की रेखायें देखने में आती हैं।
• जो भी थोड़ा बहुत फिकर आता है तो मेरे को तेरे में बदल लो। फर्क क्या है? ते और मैं, इतना छोटा सा फर्क है।
• कोई भी निर्बल आत्मा आपके सामने आये तो उस निर्बल को बल दो।
• तीव्र पुरुषार्थी बनने के लिए मुख्य पुरुषार्थ है सेकण्ड में बिन्दी लगाना। सेकण्ड और बिन्दी, दोनों समान।
• वरदान: स्वरूप बन अन्य आत्माओं को भी स्वरूप का अनुभव कराना - यही है सबूत देना अर्थात् सपूत वा साक्षात्कार मूर्त बनना।
• हिम्मते बच्चे एक बार तो बाप हजार बार मददगार है।
• सण्डे के दिन जो भी कुछ अपने जीवन में संकल्प मात्र भी कमजोरी हो, स्वप्न मात्र भी कमजोरी हो उसको छुट्टी देना है।
ओम् शान्ति।
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