"रामसेना के कूच की सूचना पाकर रावण आपात सभा आहूत करता है और मंत्रियों के साथ विचार विमर्श करता है। मेघनाद कहता है कि यदि उस दिन हनुमान को जीवित न छोड़ा जाता तो राम को लंका का पता भी न चलता। सेनापति अकम्पन का विचार है कि राम सेना लंका पहुँचने के लिये सौ योजन समुद्र पार नहीं कर सकेगी। विभीषण टोकते हैं कि राम का एक दूत अकेले लंका पहुँच चुका है तो लंका की सुरक्षा अभेद्य नहीं रह गयी है। विभीषण राम को सम्मानजनक शब्दों से सम्बोधित करते हैं तो रावण क्रोधित होता है। मेघनाद चाचा विभीषण को राक्षसकुल का द्रोही कहता है। विभीषण भतीजे मेघनाद को अनुभवहीन बालक कहकर नीति समझाने का प्रयास करते हैं। तब मेघनाद अपनी वीरता का बखान करता है कि उसने ऐरावत हाथी का दाँत तोड़कर उसपर सवार इन्द्र को आकाश से धरती पर ला पटका था और इन्द्रजीत कहलाया था, उसे नासमझ बालक कैसे कहा जा सकता है। विभीषण लंकेश से कहते हैं कि वह राम के शौर्य की गाथा न भूले। राम के बाणों से सुबाहु, कबन्ध, विराध, खर दूषण, त्रिशिरा और बालि जैसे महायोद्धा मारे जा चुके हैं। उनके दूत के शौर्य से लंका के विनाश चिन्ह आज भी दिखायी पड़ रहे हैं। विभीषण कहते हैं कि जिस राजा के मंत्री चाटुकार होते हैं और भयवश राजा से सिर्फ प्रिय बात कहते हैं, उस राजा और उसके राज्य का शीघ्र नाश हो जाता है। इसलिये विभीषण रावण से चाटुकार मंत्रियों की बजाय उनकी बात पर विचार करने का अनुरोध करते हैं। रावण विभीषण पर हनुमान को लंका के भेद बताने का दोषी करार देता है और उन्हें राज्य से निष्कासित करते हुए पद प्रहार करता है। विभीषण नीचे गिरते हैं। पूरी राजसभा विभीषण के यूँ अपमान पर हँसती है। विभीषण के हितैषी परामर्शदाता उनसे कहते हैं कि उनके पास इतना सैन्यबल नहीं है कि वे राज विद्रोह करके रावण को सिंहासन से उतार सकें, इसलिये उन्हें राम की शरण में जाकर उनके साथ मिल जाना चाहिये। विभीषण धर्मसंकट में पड़ जाते हैं। वे अपनी माँ कैकसी से परामर्श लेने जाते हैं। कैकसी कहती हैं कि अगर विभीषण लंका में रुके तो रावण उन्हें बन्दी बना सकता है। वो विभीषण से लंका के बाहर जाकर लंका की प्रजा के हित के लिये कार्य करने को कहती हैं। कैकसी कहती है कि उनके पिता ऋषि विश्रवा पहले ही भविष्यवाणी कर चुके थे कि भगवान विष्णु ने रघुकुल में जन्म ले लिया है और उनके हाथों रावण के कुल का नाश होगा लेकिन छोटा पुत्र विभीषण राक्षस जाति को खत्म होने से बचायेगा। विनाश काले, विपरीत बु़द्धि, विभीषण आखिरी बार रावण को समझाने जाते हैं लेकिन रावण की बुद्धि, रावण का साथ नहीं देती।
रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी। इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित 'रामायण' और तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' पर आधारित है।
इस धारावाहिक को रिकॉर्ड 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा था, जो किसी भी भारतीय टेलीविजन श्रृंखला के लिए एक कीर्तिमान है।
निर्माता और निर्देशक - रामानंद सागर
सहयोगी निर्देशक - आनंद सागर, मोती सागर
कार्यकारी निर्माता - सुभाष सागर, प्रेम सागर
मुख्य तकनीकी सलाहकार - ज्योति सागर
पटकथा और संवाद - रामानंद सागर
संगीत - रविंद्र जैन
शीर्षक गीत - जयदेव
अनुसंधान और अनुकूलन - फनी मजूमदार, विष्णु मेहरोत्रा
संपादक - सुभाष सहगल
कैमरामैन - अजीत नाइक
प्रकाश - राम मडिक्कर
साउंड रिकॉर्डिस्ट - श्रीपाद, ई रुद्र
वीडियो रिकॉर्डिस्ट - शरद मुक्न्नवार
In association with Divo - our YouTube Partner
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"रामसेना के कूच की सूचना पाकर रावण आपात सभा आहूत करता है और मंत्रियों के साथ विचार विमर्श करता है। मेघनाद कहता है कि यदि उस दिन हनुमान को जीवित न छोड़ा जाता तो राम को लंका का पता भी न चलता। सेनापति अकम्पन का विचार है कि राम सेना लंका पहुँचने के लिये सौ योजन समुद्र पार नहीं कर सकेगी। विभीषण टोकते हैं कि राम का एक दूत अकेले लंका पहुँच चुका है तो लंका की सुरक्षा अभेद्य नहीं रह गयी है। विभीषण राम को सम्मानजनक शब्दों से सम्बोधित करते हैं तो रावण क्रोधित होता है। मेघनाद चाचा विभीषण को राक्षसकुल का द्रोही कहता है। विभीषण भतीजे मेघनाद को अनुभवहीन बालक कहकर नीति समझाने का प्रयास करते हैं। तब मेघनाद अपनी वीरता का बखान करता है कि उसने ऐरावत हाथी का दाँत तोड़कर उसपर सवार इन्द्र को आकाश से धरती पर ला पटका था और इन्द्रजीत कहलाया था, उसे नासमझ बालक कैसे कहा जा सकता है। विभीषण लंकेश से कहते हैं कि वह राम के शौर्य की गाथा न भूले। राम के बाणों से सुबाहु, कबन्ध, विराध, खर दूषण, त्रिशिरा और बालि जैसे महायोद्धा मारे जा चुके हैं। उनके दूत के शौर्य से लंका के विनाश चिन्ह आज भी दिखायी पड़ रहे हैं। विभीषण कहते हैं कि जिस राजा के मंत्री चाटुकार होते हैं और भयवश राजा से सिर्फ प्रिय बात कहते हैं, उस राजा और उसके राज्य का शीघ्र नाश हो जाता है। इसलिये विभीषण रावण से चाटुकार मंत्रियों की बजाय उनकी बात पर विचार करने का अनुरोध करते हैं। रावण विभीषण पर हनुमान को लंका के भेद बताने का दोषी करार देता है और उन्हें राज्य से निष्कासित करते हुए पद प्रहार करता है। विभीषण नीचे गिरते हैं। पूरी राजसभा विभीषण के यूँ अपमान पर हँसती है। विभीषण के हितैषी परामर्शदाता उनसे कहते हैं कि उनके पास इतना सैन्यबल नहीं है कि वे राज विद्रोह करके रावण को सिंहासन से उतार सकें, इसलिये उन्हें राम की शरण में जाकर उनके साथ मिल जाना चाहिये। विभीषण धर्मसंकट में पड़ जाते हैं। वे अपनी माँ कैकसी से परामर्श लेने जाते हैं। कैकसी कहती हैं कि अगर विभीषण लंका में रुके तो रावण उन्हें बन्दी बना सकता है। वो विभीषण से लंका के बाहर जाकर लंका की प्रजा के हित के लिये कार्य करने को कहती हैं। कैकसी कहती है कि उनके पिता ऋषि विश्रवा पहले ही भविष्यवाणी कर चुके थे कि भगवान विष्णु ने रघुकुल में जन्म ले लिया है और उनके हाथों रावण के कुल का नाश होगा लेकिन छोटा पुत्र विभीषण राक्षस जाति को खत्म होने से बचायेगा। विनाश काले, विपरीत बु़द्धि, विभीषण आखिरी बार रावण को समझाने जाते हैं लेकिन रावण की बुद्धि, रावण का साथ नहीं देती।
रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी। इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित 'रामायण' और तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' पर आधारित है।
इस धारावाहिक को रिकॉर्ड 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा था, जो किसी भी भारतीय टेलीविजन श्रृंखला के लिए एक कीर्तिमान है।
निर्माता और निर्देशक - रामानंद सागर
सहयोगी निर्देशक - आनंद सागर, मोती सागर
कार्यकारी निर्माता - सुभाष सागर, प्रेम सागर
मुख्य तकनीकी सलाहकार - ज्योति सागर
पटकथा और संवाद - रामानंद सागर
संगीत - रविंद्र जैन
शीर्षक गीत - जयदेव
अनुसंधान और अनुकूलन - फनी मजूमदार, विष्णु मेहरोत्रा
संपादक - सुभाष सहगल
कैमरामैन - अजीत नाइक
प्रकाश - राम मडिक्कर
साउंड रिकॉर्डिस्ट - श्रीपाद, ई रुद्र
वीडियो रिकॉर्डिस्ट - शरद मुक्न्नवार
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