00:00 - नागवंश की उत्पत्ति
01:30 - अंडे क्यों दिए?
03:00 - गरुड़ का जन्म
नागवंश का सम्पूर्ण प्रमाणिक इतिहास | अंडे से जन्म से 1952 तक का सच
नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे नागवंश के सम्पूर्ण इतिहास की। नागवंश कैसे पैदा हुआ, अंडों से जन्म क्यों हुआ, भाई-भाई में दुश्मनी कैसे हुई, नागो की जीभ दो भागो में कैसे हुईं और 1952 तक का पूरा सच। ये पूरी कथा महाभारत के आदि पर्व के आस्तीक पर्व से ली गई है।
भाग 1 - उत्पत्ति:
ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि, मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप की 13 पत्नियाँ थीं। उनमें दो सगी बहनें कद्रू और विनता थीं। कद्रू ने 1000 तेजस्वी नाग पुत्रों का वरदान माँगा और विनता ने 2 पुत्रों का।
भाग 2 - अंडे क्यों:
कद्रू और विनता दिव्य योनि थीं। सर्प और पक्षी अंडज होते हैं इसलिए अंडे दिए। कद्रू ने 1000 अंडे और विनता ने 2 अंडे दिए।
भाग 3 - अरुण और गरुड़:
कद्रू के 1000 अंडे 500 साल में फूटे - शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक आदि पैदा हुए। विनता ने एक अंडा जल्दी तोड़ा तो अरुण पैदा हुए जिन्होंने माता को 500 साल दासी बनने का श्राप दिया। बाद में अरुण सूर्यदेव के सारथी बने। दूसरा अंडा 1000 साल बाद फूटा तो गरुड़ पैदा हुए।
भाग 4 - उच्चैःश्रवा घोड़ा:
समुद्र मंथन से निकले घोड़े के रंग पर शर्त लगी। कद्रू के छल से विनता दासी बनी। जिन नागों ने छल से मना किया उन्हें कद्रू ने श्राप दिया कि जनमेजय के यज्ञ में जल जाओगे।
भाग 5 - जीभ दो फाड़:
गरुड़ अमृत लाए, इंद्र ने वापस ले लिया। कुशा पर गिरी बूंदों को चाटने से नागों की जीभ चिर गई। तभी से जीभ दो फाड़ है।
भाग 6 - 3 नायक:
शेषनाग - पृथ्वी को धारण कर रहे हैं। वासुकी - नागों के राजा और शिव जी के गले का हार। तक्षक - सबसे प्रतिशोधी।
भाग 7 - खांडव वन:
अर्जुन ने खांडव वन जलाया तो तक्षक की पत्नी मारी गई, पुत्र अश्वसेन बच गया और कर्ण के बाण में घुसकर बदला लेने आया।
भाग 8 - सर्पसत्र यज्ञ:
तक्षक ने परीक्षित को डसा, जनमेजय ने यज्ञ किया।
भाग 9 - रक्षा:
वासुकी की बहन जरत्कारु (मनसा देवी) और ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने यज्ञ रोकवाया। जिस दिन यज्ञ रुका वो सावन शुक्ल पंचमी थी, इसलिए नागपंचमी पर कच्चा दूध चढ़ता है।
भाग 10 - 1952 तक:
भारशिव नागवंश ने 2री से 4थी शताब्दी में राज किया। छोटानागपुर में 64 ईस्वी से फणि मुकुट राय ने 1800 साल राज किया और 1952 में जमींदारी खत्म होने के साथ अंत हुआ।
स्रोत: महाभारत आदि पर्व, आस्तीक पर्व
कमेंट में लिखें - हर हर महादेव, जय नाग देवता की
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01:30 - अंडे क्यों दिए?
03:00 - गरुड़ का जन्म
नागवंश का सम्पूर्ण प्रमाणिक इतिहास | अंडे से जन्म से 1952 तक का सच
नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे नागवंश के सम्पूर्ण इतिहास की। नागवंश कैसे पैदा हुआ, अंडों से जन्म क्यों हुआ, भाई-भाई में दुश्मनी कैसे हुई, नागो की जीभ दो भागो में कैसे हुईं और 1952 तक का पूरा सच। ये पूरी कथा महाभारत के आदि पर्व के आस्तीक पर्व से ली गई है।
भाग 1 - उत्पत्ति:
ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि, मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप की 13 पत्नियाँ थीं। उनमें दो सगी बहनें कद्रू और विनता थीं। कद्रू ने 1000 तेजस्वी नाग पुत्रों का वरदान माँगा और विनता ने 2 पुत्रों का।
भाग 2 - अंडे क्यों:
कद्रू और विनता दिव्य योनि थीं। सर्प और पक्षी अंडज होते हैं इसलिए अंडे दिए। कद्रू ने 1000 अंडे और विनता ने 2 अंडे दिए।
भाग 3 - अरुण और गरुड़:
कद्रू के 1000 अंडे 500 साल में फूटे - शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक आदि पैदा हुए। विनता ने एक अंडा जल्दी तोड़ा तो अरुण पैदा हुए जिन्होंने माता को 500 साल दासी बनने का श्राप दिया। बाद में अरुण सूर्यदेव के सारथी बने। दूसरा अंडा 1000 साल बाद फूटा तो गरुड़ पैदा हुए।
भाग 4 - उच्चैःश्रवा घोड़ा:
समुद्र मंथन से निकले घोड़े के रंग पर शर्त लगी। कद्रू के छल से विनता दासी बनी। जिन नागों ने छल से मना किया उन्हें कद्रू ने श्राप दिया कि जनमेजय के यज्ञ में जल जाओगे।
भाग 5 - जीभ दो फाड़:
गरुड़ अमृत लाए, इंद्र ने वापस ले लिया। कुशा पर गिरी बूंदों को चाटने से नागों की जीभ चिर गई। तभी से जीभ दो फाड़ है।
भाग 6 - 3 नायक:
शेषनाग - पृथ्वी को धारण कर रहे हैं। वासुकी - नागों के राजा और शिव जी के गले का हार। तक्षक - सबसे प्रतिशोधी।
भाग 7 - खांडव वन:
अर्जुन ने खांडव वन जलाया तो तक्षक की पत्नी मारी गई, पुत्र अश्वसेन बच गया और कर्ण के बाण में घुसकर बदला लेने आया।
भाग 8 - सर्पसत्र यज्ञ:
तक्षक ने परीक्षित को डसा, जनमेजय ने यज्ञ किया।
भाग 9 - रक्षा:
वासुकी की बहन जरत्कारु (मनसा देवी) और ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने यज्ञ रोकवाया। जिस दिन यज्ञ रुका वो सावन शुक्ल पंचमी थी, इसलिए नागपंचमी पर कच्चा दूध चढ़ता है।
भाग 10 - 1952 तक:
भारशिव नागवंश ने 2री से 4थी शताब्दी में राज किया। छोटानागपुर में 64 ईस्वी से फणि मुकुट राय ने 1800 साल राज किया और 1952 में जमींदारी खत्म होने के साथ अंत हुआ।
स्रोत: महाभारत आदि पर्व, आस्तीक पर्व
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