साँस इस समय भी चल रही है, और आपने उसे चलाने का आदेश नहीं दिया।
जो चीज़ आपके भीतर बिना आपके आदेश के चल रही है, क्या वही आपको आपके ही भीतर ले जा सकती है?
इसी एक सवाल के साथ यह पूरा चिंतन चलता है।
इस वीडियो में सोऽहम् मंत्र का अर्थ, सोऽहम् साधना और सोऽहम् प्राण क्रिया की सरल समझ, अजपा जप क्या होता है, श्वास पर ध्यान कैसे रखा जाता है, और दो श्वासों के बीच की वह छोटी-सी जगह जिसे परंपरा मध्य कहती है। साथ में सोऽहम् ध्यान का वह सबसे बड़ा नियम, जिसे भूल जाने पर यह अभ्यास उल्टा थका देता है — श्वास को देखना है, चलाना नहीं।
00:00 बिना आदेश की यात्रा | सोऽहम् साधना का पहला सवाल
00:40 "मुझसे ध्यान नहीं होगा" | ध्यान क्यों छूट जाता है
01:50 सोऽहम् मंत्र का अर्थ | अजपा जप क्या है
03:10 साँस वह पुल है | स्वचालित और नियंत्रित के बीच
04:20 सबसे बड़ा नियम: देखना है, चलाना नहीं
07:00 दो साँसों के बीच की जगह | मध्य क्या है
09:07 विज्ञान और परंपरा कहाँ अलग होते हैं
11:00 लौटना असफलता नहीं, यही असली अभ्यास है
12:36 सोऽहम् प्राण क्रिया: सरल अभ्यास कैसे करें
14:00 थकान विचारों की नहीं, खींचतान की थी
15:30 चलते-फिरते सोऽहम् | गृहस्थ जीवन में अभ्यास
17:30 "मैं वही हूँ" का अर्थ अहंकार नहीं है
19:38 देखने वाला कौन है | साक्षी की खोज
20:40 कहानी का शांत अंत
22:00 मार्ग की उलझनें | 3 आम सवाल
23:53 वही सवाल, एक बार फिर
आपके लिए दो प्रश्न:
सो और हम् को जब आपने पहली बार अपनी श्वास के साथ रखा, तो कौन-सा अधिक सहज लगा — भीतर जाती श्वास पर, या बाहर आती श्वास पर?
और इस समय आपको सबसे पहले किसका पता चल रहा है — शरीर का, श्वास का, विचारों का, या उस चुप्पी का जो इन सबके पीछे है?
टिप्पणी में एक पंक्ति लिख दीजिए। दूसरों के उत्तर पढ़ना भी अपने आप में एक तरह का सत्संग है।
इस चैनल पर ध्यान, चेतना, श्वास, क्रिया योग, उपनिषद और सनातन परंपरा की बातें सरल भाषा में, बिना किसी दावे के।
नई बातें आप तक पहुँचती रहें, इसके लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह वीडियो सोऽहम् ध्यान, श्वास-जागरूकता, अजपा-जप और भारतीय योग एवं ध्यान-परंपरा से जुड़े आध्यात्मिक, दार्शनिक एवं शैक्षिक चिंतन पर आधारित है। इसका उद्देश्य इन पारंपरिक विचारों और अभ्यासों को सरल रूप में समझाना है। इसे चिकित्सा सलाह, वैज्ञानिक प्रमाण या किसी निश्चित आध्यात्मिक परिणाम की गारंटी न माना जाए।
वीडियो में विज्ञान भैरव तंत्र, सोऽहम् साधना, अजपा-जप तथा क्रिया योग से जुड़े विचार पारंपरिक और व्याख्यात्मक संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं। विभिन्न ग्रंथों, अनुवादों और साधना-परंपराओं में इनके अर्थ, विधि और व्याख्या अलग हो सकती है।
वीडियो में बताया गया सोऽहम् अभ्यास केवल सहज श्वास-जागरूकता और आत्म-अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया गया है। अभ्यास को बिल्कुल सहज रखें और साँस को अपनी स्वाभाविक गति से चलने दें। इसे अपनी सुविधा और सहजता के अनुसार अपनाएँ। यदि कभी मन या शरीर थोड़ा असहज लगे, तो कुछ समय रुककर सामान्य रूप से रहें।
साँस, ध्यान और भीतर के अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष अनुभव, शांति, ऊर्जा या ध्यानावस्था को आवश्यक परिणाम मानने की जरूरत नहीं है।
वीडियो में आधुनिक विज्ञान और शरीर-विज्ञान से जुड़े संदर्भ केवल सामान्य जानकारी और समझ के लिए दिए गए हैं। उन्हें सोऽहम् साधना या किसी आध्यात्मिक सिद्धांत का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
क्रिया योग और अन्य पारंपरिक साधनाओं की उन्नत विधियाँ योग्य गुरु या संबंधित परंपरा के मार्गदर्शन में सीखना उचित है। यह वीडियो किसी विशेष दीक्षा या उन्नत साधना का विकल्प नहीं है।
वीडियो में प्रयुक्त कुछ दृश्य AI-assisted artistic tools और digital artwork से निर्मित हो सकते हैं तथा केवल प्रतीकात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति हैं।
समस्त भारतीय योग, ध्यान एवं ऋषि-परंपरा को सादर प्रणाम
#lahirimahasaya #kriyayoga #spiritualreflections #soham #antarsamvedna #yogicpractice
साँस इस समय भी चल रही है, और आपने उसे चलाने का आदेश नहीं दिया।
जो चीज़ आपके भीतर बिना आपके आदेश के चल रही है, क्या वही आपको आपके ही भीतर ले जा सकती है?
इसी एक सवाल के साथ यह पूरा चिंतन चलता है।
इस वीडियो में सोऽहम् मंत्र का अर्थ, सोऽहम् साधना और सोऽहम् प्राण क्रिया की सरल समझ, अजपा जप क्या होता है, श्वास पर ध्यान कैसे रखा जाता है, और दो श्वासों के बीच की वह छोटी-सी जगह जिसे परंपरा मध्य कहती है। साथ में सोऽहम् ध्यान का वह सबसे बड़ा नियम, जिसे भूल जाने पर यह अभ्यास उल्टा थका देता है — श्वास को देखना है, चलाना नहीं।
00:00 बिना आदेश की यात्रा | सोऽहम् साधना का पहला सवाल
00:40 "मुझसे ध्यान नहीं होगा" | ध्यान क्यों छूट जाता है
01:50 सोऽहम् मंत्र का अर्थ | अजपा जप क्या है
03:10 साँस वह पुल है | स्वचालित और नियंत्रित के बीच
04:20 सबसे बड़ा नियम: देखना है, चलाना नहीं
07:00 दो साँसों के बीच की जगह | मध्य क्या है
09:07 विज्ञान और परंपरा कहाँ अलग होते हैं
11:00 लौटना असफलता नहीं, यही असली अभ्यास है
12:36 सोऽहम् प्राण क्रिया: सरल अभ्यास कैसे करें
14:00 थकान विचारों की नहीं, खींचतान की थी
15:30 चलते-फिरते सोऽहम् | गृहस्थ जीवन में अभ्यास
17:30 "मैं वही हूँ" का अर्थ अहंकार नहीं है
19:38 देखने वाला कौन है | साक्षी की खोज
20:40 कहानी का शांत अंत
22:00 मार्ग की उलझनें | 3 आम सवाल
23:53 वही सवाल, एक बार फिर
आपके लिए दो प्रश्न:
सो और हम् को जब आपने पहली बार अपनी श्वास के साथ रखा, तो कौन-सा अधिक सहज लगा — भीतर जाती श्वास पर, या बाहर आती श्वास पर?
और इस समय आपको सबसे पहले किसका पता चल रहा है — शरीर का, श्वास का, विचारों का, या उस चुप्पी का जो इन सबके पीछे है?
टिप्पणी में एक पंक्ति लिख दीजिए। दूसरों के उत्तर पढ़ना भी अपने आप में एक तरह का सत्संग है।
इस चैनल पर ध्यान, चेतना, श्वास, क्रिया योग, उपनिषद और सनातन परंपरा की बातें सरल भाषा में, बिना किसी दावे के।
नई बातें आप तक पहुँचती रहें, इसके लिए चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह वीडियो सोऽहम् ध्यान, श्वास-जागरूकता, अजपा-जप और भारतीय योग एवं ध्यान-परंपरा से जुड़े आध्यात्मिक, दार्शनिक एवं शैक्षिक चिंतन पर आधारित है। इसका उद्देश्य इन पारंपरिक विचारों और अभ्यासों को सरल रूप में समझाना है। इसे चिकित्सा सलाह, वैज्ञानिक प्रमाण या किसी निश्चित आध्यात्मिक परिणाम की गारंटी न माना जाए।
वीडियो में विज्ञान भैरव तंत्र, सोऽहम् साधना, अजपा-जप तथा क्रिया योग से जुड़े विचार पारंपरिक और व्याख्यात्मक संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं। विभिन्न ग्रंथों, अनुवादों और साधना-परंपराओं में इनके अर्थ, विधि और व्याख्या अलग हो सकती है।
वीडियो में बताया गया सोऽहम् अभ्यास केवल सहज श्वास-जागरूकता और आत्म-अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया गया है। अभ्यास को बिल्कुल सहज रखें और साँस को अपनी स्वाभाविक गति से चलने दें। इसे अपनी सुविधा और सहजता के अनुसार अपनाएँ। यदि कभी मन या शरीर थोड़ा असहज लगे, तो कुछ समय रुककर सामान्य रूप से रहें।
साँस, ध्यान और भीतर के अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष अनुभव, शांति, ऊर्जा या ध्यानावस्था को आवश्यक परिणाम मानने की जरूरत नहीं है।
वीडियो में आधुनिक विज्ञान और शरीर-विज्ञान से जुड़े संदर्भ केवल सामान्य जानकारी और समझ के लिए दिए गए हैं। उन्हें सोऽहम् साधना या किसी आध्यात्मिक सिद्धांत का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
क्रिया योग और अन्य पारंपरिक साधनाओं की उन्नत विधियाँ योग्य गुरु या संबंधित परंपरा के मार्गदर्शन में सीखना उचित है। यह वीडियो किसी विशेष दीक्षा या उन्नत साधना का विकल्प नहीं है।
वीडियो में प्रयुक्त कुछ दृश्य AI-assisted artistic tools और digital artwork से निर्मित हो सकते हैं तथा केवल प्रतीकात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति हैं।
समस्त भारतीय योग, ध्यान एवं ऋषि-परंपरा को सादर प्रणाम
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