"सुनिए वो दर्द भरी पुरबी जो आज भी दिल छू जाती है —महेंद्र मिसिर की अमर रचना, HD Audio में पहली बार!"

ForTheHeritage

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इस प्रस्तुति में प्रस्तुत है महेंद्र मिसिर द्वारा रचित एक दुर्लभ पुरबी गीत — "सासु मोरा मारे रामा बाँस के छिउँकिया"। यह गीत विरह (जुदाई) की भावना को बेहद सुंदर तरीके से दर्शाता है, जो पारंपरिक भोजपुरी लोकसंगीत की गहराई और भावनात्मक शक्ति को दर्शाता है।

महेंद्र मिसिर पुरबी और भोजपुरी लोकसंगीत के एक महान रचनाकार थे, जिन्होंने अनेक अमर लोकगीतों की रचना की, जो आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।

हम ऐसे अनमोल और दुर्लभ लोकगीतों को उच्च गुणवत्ता (HD) ऑडियो में आप तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, ताकि यह सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।

Dear viewers,
This presentation features a rare Purbi folk song, "Sasu Mora Maare Rama Baans Ke Chhiunkiya," composed by the legendary Mahendra Misir. This song beautifully captures the emotion of viraha (separation), reflecting the depth and emotional richness of traditional Bhojpuri folk music.

Mahendra Misir was one of the greatest composers of Purbi and Bhojpuri folk music, creating timeless songs that continue to resonate with audiences even today.

We are committed to bringing such priceless and rare folk songs to you in HD audio, preserving this cultural heritage for generations to come.

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सासु मोरा मारे रामा बाँस के छिउँकिया
ए ननदिया मोरी रे,

सुसुकत पनिया के जाय, ए ननदिया...
हाथवा में लिहली ननदो सोने के घरिलवा

ए ननदिया मोरी रे,
चलि भइली जमुना किनार। ए ननदिया...

गंगा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
ए ननदिया मोरी रे,

पउआँ धरत बिछलाय। ए ननदिया...
छोटी-मुटी जामुन गछिया फरे ना फुले के

ए ननदिया मोरी रे,
सेहो गछिया सूखियो ना जाय। ए ननदिया...

छोटे-मोटे पातर पियवा हँस के ना बोले
ए ननदिया मोरी रे,

अइसन पियवा कहीं चलि जाय। ए ननदिया...
गावत महेन्दर मिसिर इहो रे पुरुबिया

ए ननदिया मोरी रे,
पिया बिनु रहलो ना जाय। ए ननदिया...