रांची ,नामकुम बाजार में विदेशी महिला | Namkum tribal market Ranchi|
जोहार दोस्तों
, हमारे भारतीय अपने संस्कार और अतिथियों के आदर के लिए पूरे देश भर में प्रसिद्ध हैं , आज हमारे झारखंड में एक विदेशी मेहमान इटली ( यूरोप ) से आए हैं , जिन्हें हम अपनी झारखंड की संस्कृति और यहां का रहन सहन को करीब से दिखाने के लिए नामकुम बाजार लेकर आए हैं ,ताकि वो इन्हें करीब से जान सके ।
हित-कुटुम्ब, नाते-रिश्तेदार, दोस्त-मित्रों को भी हड़िया परोस कर स्वागत करने की परम्परा झारखण्ड के जनजातीय एवं मूलवासी परिवारों में रही है और आज भी है। सार्वजनिक समारोहां में भी हड़िया का सेवन वर्जित नहीं है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हड़िया को प्रतिष्ठापूर्वक पारम्परिक पेय के रूप में लोग सेवन करने से परहेज नहीं करते।हड़िया और परम्परासर्वेक्षण के अनुसार स्पष्ट होता है कि झारखण्ड के जनसमाज में हड़िया एक मादक पेय होते हुए भी परम्परागत और सांस्कृतिक रूप से सर्वग्राह्य एवं प्रचलित पेय पदार्थ है। यह कृषि-श्रमिकों को भी पीने के लिए दिया जाता है। इससे श्रमिकों में उत्साह और श्रम की प्रवृति प्रबल होती है। जबकि हड़िया को किसी भी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक या पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान भी पवित्रतापूर्वक उपयोग किया जाता है। इसे न केवल कुल देवता पर चढ़ाया जाता है बल्कि अन्य देवी-देवताओं पर भी चढ़ा कर श्रद्धा अर्पित करते हैंं। शादी-ब्याह, जन्म-मरण के अवसरों पर भी हड़िया का सामूहिक सेवन वर्जित नहीं है। वस्तुतः ऐसे अवसरों पर हड़िया का सेवन कराना सामाजिक रूप से अनिवार्य माना जाता है
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आप सभी का बहुत साथ मिला है, उम्मीद करता हूं कि आप आगे भी ऐसा ही साथ देगें। कोई सुधार की जरूरत हो तो कृपया बताएं। और अपने भाई की मदद करें।
TEAM-
NITISH & CUISINE
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हित-कुटुम्ब, नाते-रिश्तेदार, दोस्त-मित्रों को भी हड़िया परोस कर स्वागत करने की परम्परा झारखण्ड के जनजातीय एवं मूलवासी परिवारों में रही है और आज भी है। सार्वजनिक समारोहां में भी हड़िया का सेवन वर्जित नहीं है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हड़िया को प्रतिष्ठापूर्वक पारम्परिक पेय के रूप में लोग सेवन करने से परहेज नहीं करते।हड़िया और परम्परासर्वेक्षण के अनुसार स्पष्ट होता है कि झारखण्ड के जनसमाज में हड़िया एक मादक पेय होते हुए भी परम्परागत और सांस्कृतिक रूप से सर्वग्राह्य एवं प्रचलित पेय पदार्थ है। यह कृषि-श्रमिकों को भी पीने के लिए दिया जाता है। इससे श्रमिकों में उत्साह और श्रम की प्रवृति प्रबल होती है। जबकि हड़िया को किसी भी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक या पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान भी पवित्रतापूर्वक उपयोग किया जाता है। इसे न केवल कुल देवता पर चढ़ाया जाता है बल्कि अन्य देवी-देवताओं पर भी चढ़ा कर श्रद्धा अर्पित करते हैंं। शादी-ब्याह, जन्म-मरण के अवसरों पर भी हड़िया का सामूहिक सेवन वर्जित नहीं है। वस्तुतः ऐसे अवसरों पर हड़िया का सेवन कराना सामाजिक रूप से अनिवार्य माना जाता है
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