वस्तु स्वरूप की व्यवस्थित व्याख्या करते हुए गुरुदेव हम सभी को समझा रहे हैं 👌.... वर्तमान पर्याय की हालत दशा अवस्था तो पूर्वोपार्जित कर्माधीन उदयप्रमाण है, तुम बिल्कुल डरना मत, पर्याय के परिणमन को स्वीकार करते हुए, अंदर में, 🌹भेदज्ञान कायम रखना 🌹 ये मैं नहीं हूं, ये मेरा शास्वत स्वरूप नहीं है, मैं तो अनादि अनंत नित्य शुद्ध,जो जानने देखने वाला... 🌹 ज्ञायक तत्व है वो मैं हूं 🌹 गजब की बात कही गुरुदेव ने 👌 पाप के उदय से कोई पापी नहीं होता, पाप का उदय तो धर्मात्मा जीवों का भी आता है, पाप के...🌹 परिणामों से बंध होता है 🌹