सप्रेम प्रणामजी भारत वर्ष की यह विशेषता है कि प्रति एक युग में एक महापुरुष अवतरित हुआ है जीसने एक भारत वर्ष की पहचान कराई है अखंड भारत की बात कही है,,,, जहां जाती धर्म वर्ण व्यवस्था से उपर की बात कही गई है,,,, यही एक विशेषता है जो भारत को एक नए भारत की पहचान देती है,, अगर बात संस्कृत की हो बात ज्ञान और विज्ञान मय परंपरा की वेद परंपरा की हो अखंड भारत की हो तो,,,,,, हमें ज्ञान मार्ग को ही चुनना होगा,,,, यही ज्ञान हमें अद्वैत की ओर ले जाता है जहां संसार की कोई विषमता पहुंच नही पाती है,, ईसी विषमता के कारण भारत खंड खंड हुआ था, जाती धर्म वर्ण संप्रदाय वाद ने बेडा गरक किया है अगर कोई एक भारत की बात करता है तो ईसी बात पर सोचना चाहिए गीता के कथनो को उपदेश को आत्मसात करना चाहिए व्यक्ति गत सोच कुछ भी हो लेकिन जब ज्ञान की विज्ञानकी बात हो तब एक ऐसी विचारधारा का समर्थन करना चाहिए जो हमे एक दिली से एक रुपता मे एक माला में मोती की तरह पीरोती हो आज ऐसी एक ही विचार धारा है जो हमे एक सुत्र में बाधती है,, न जाती न धर्म न वर्ण न संप्रदाय,,, आत्म जागृति ही हमारा परम लक्ष्य है स्वामी जी के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम जी सच में किसी ने क्या खुल गाया है तेरी वाणी में युग का आह्वान है, मनुष्य तु बडा महान है,,भुल मत,, अगर हमें अपने निज स्वरूप की पहचान हो जाती है तो,,, चरण स्पर्श ❤